स्वतंत्र भारत की कुंडली के कुछ विशेष ग्रहयोग

 2048 Views
 0 Comments
 January 25, 2017

दिनांक 15 अगस्त 1947 समय 00:00:00 दिल्ली के मानक समय के अनुसार उस समय के ग्रह गोचर के हिसाब से स्वतंत्र भारतकी कुंडली बनायीं गयी थी, तो कैसी है भारत की कुंडली में ग्रहों की स्थिति और कौनसे विशेष ग्रहयोग बने हैं भारत की कुंडली मेंआईये जानते हैं।

15 अगस्त 1947 के हिसाब बनी भारत की कुंडली “वृष लग्नऔरकर्क राशिऔरपुष्य नक्षत्रकी है जिसके लग्न और सप्तमभाव में परस्पर राहु–केतु हैं दूसरे भाव में मंगल, बृहस्पति छटे भाव में तथा सूर्य, बुध, चन्द्रमाँ, शुक्र और शनि तीसरे भाव में पंचग्रहीयोग बना रहे हैं। लग्न और लग्नेश कुंडली का सबसे महत्वपूर्ण अंग होते हैं भारत की कुंडली वृष लग्न की है जिसका स्वामी अर्थातलग्नेश शुक्र है शुक्र को कला, सौन्दर्य, रचनात्मक और कलात्मक कार्य, संगीत आदि रोचक कार्यो का कारक माना गया है और भारतकी कुंडली में शुक्र की विशेष प्रधानता है जिससे भारत कला, सौन्दर्य, संगीत और रचनात्मक कार्यों में सदैव अग्रणी रहता है भारतकी विभिन्न कला और यहाँ का अनूठा सौन्दर्य विश्व भर के लोगों को यहाँ आने पर मबबूर कर देता है, शुक्र की प्रधानता के कारण हीभारत का संगीत चाहे वो यहाँ का शास्त्रीय संगीत हो, लोक संगीत या फिर फ़िल्मी संगीत भारत के संगीत ने सम्पूर्ण विश्व पर अपनीविशेष छाप हमेशा छोड़ी है। स्वतंत्रता से अब तक के सफर में भारत के सिनेमा ने भी विश्वस्तरीय पटल पर अपनी बड़ी विशेष पहचानबनायीं है ये भी लग्नेश शुक्र की प्रधानता के कारण ही है।

भारत की कुंडली में शुक्र, शनि और बुध त्रिकोण के स्वामी होने से शुभ कारक ग्रह है शुक्र लग्नेश, बुध पंचमेश और शनि भाग्यस्थान और कर्म स्थान का स्वामी होने से ये तीनो ग्रह भारत की कुंडली में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका  निभा रहे हैं, ज्योतिषीय नियमो केअनुसार यदि तीनो त्रिकोण के स्वामी एक साथ बैठे हों तो यह परम राजयोग बनाता है भारत की कुंडली में त्रिकोण के तीनो स्वामीशनि, शुक्र और बुध एक साथ तीसरे भाव में बैठकर यह राजयोग बना रहे हैं जो भारत को विश्वस्तर पर सदैव उच्चस्तर पर रखेंगे तथाइस योग से भारत सदैव उन्नति की और अग्रसर होता रहेगा। भारत की कुंडली में बना कालसर्प योग संघर्ष को तो बढ़ाता है परंतुत्रिकोण के स्वामियों का एक साथ बैठना बहुत शुभ और दुर्लभ योग है जो भारत को सदैव उन्नति की और अग्रसर रखेगा।

अब भारत की कुंडली में बने सबसे विशेष योग की बात करते हैं भारत की कुंडली के तीसरे भाव में पंचग्रही योग बना हुआ है कुंडली कातीसरा भाव हिम्मत, शक्ति, पराक्रम, उत्साह, बल, सूचना, संचार , ट्रांसपोर्ट, लेखन, फिलॉस्फी, इनफार्मेशन टेक्नॉलॉजि कोनियंत्रिक करता है भारत की कुंडली में तीसरे भाव का स्वामी चन्द्रमाँ तीसरे भाव में ही बैठा है जिससे कुंडली का तीसरा भाव मजबूत हैइसके अलावा तीनो त्रिकोणेश शुक्र शनि व बुध भी तृतीय भाव में हैं और प्रतिष्ठा, प्रसिद्धि और आत्मविश्वास का ग्रह भी तीसरे भावमें ही है इस प्रकार पंचग्रह योग बनने से यहाँ तीसरा भाव बहुत बलवान है अतः भारत अपने पराक्रम, उत्साह और बल के लिए सदैवसर्वोच्च रहेगा, यहाँ का सेना बल हमेशा शशक्त और और विशेष पराक्रम रखने वाला रहेगा, तीसरा भाव बलि होने से भारत हमेशा अपनेशत्रुओं और विरोधियों पर विजयी रहेगा अतः भारत के अग्रसर होने में यहाँ का बल अर्थात सेना हमेशा अपनी सर्वाधिक महत्वपूर्णभूमिका निभाएगी।

भारत की कुंडली में तीसरे भाव का बलि होना यहाँ सूचना, संचार, यातायात और आईटी सेक्टर राष्ट्र की उन्नति में बहुत महत्वपूर्णसाबित होंगे। कुंडली के तीसरे भाव को लेखन और दर्शन का भी कारक माना गया है जिससे भारत के लेखक और यहाँ का लेखनविश्वस्तरीय प्रसिद्धि सदैव पाता रहेगा और भारतीय दर्शन विश्व का सदैव मार्गदर्शन करता रहेगा। भारत की कुंडली में नवम भाव भीबहुत बलवान है जो धर्म, भक्ति, आध्यात्म, आस्था और संस्कार को दर्शाता है वैसे तो भारत आदिकाल से ही आध्यात्मिक स्तर पर विश्वका मार्गदर्शन करता रहा है परंतु स्वतंत्रता के दिवस की इस कुंडली में भी नवम भाव बलि होना दिखता है के भारत की धर्म मेंगूढ़ता,आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति सदैव सर्वोच्च स्थान पर रहकर विश्व गुरु के रूप में विश्व का प्रतिनिधित्व अवश्य करेगी।

वर्तमान समय में भारत की कुंडली में चन्द्रमाँ की महादशा चल रही है जिसकी समयावधि सितंबर 2015 से सितंबर 2025 तक हैचन्द्रमाँ यहाँ पराक्रम भाव का स्वामी होकर स्व राशि में ही स्थित है तथा भाग्य स्थान को देख रहा है अतः चन्द्रमाँ की दशा भारत कीउन्नति के लिए शुभ है राष्ट्र को शशक्त बायेगी साथ ही यहाँ के भाग्योदय में भी सहायक होगी अर्थात राष्ट्र में विकास कार्य आगे बढ़ेंगेइसके अलावा 11 अगस्त 2016 को बृहस्पति का कन्या राशि में प्रवेश करना भी भारत की उन्नति के लिए बहुत शुभ है कन्या राशि काबृहस्पति “भारत” की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा स्वतंत्र भारत की कुंडली वृष लग्न की है जिसमे बृहस्पति पंचम भाव मेंप्रवेश करेगा और कुंडली के लाभ स्थान के साथ साथ कुंडली के तीनो त्रिकोण भावों को प्रभावित करेगा अतः कन्या राशि काबृहस्पति भारत में आर्थिक उन्नति कराएगा, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ेगी, प्रधानमंत्री द्वारा चलाई गयीं राष्ट्रियविकास की योजनाएं आगे बढ़ेंगी, पर विशेष रूप से 2017 में शनि का राशि परिवर्तन भारत के लिए बहुत  शुभ होगा “26 जनवरी 2017 को शनि का वृश्चिक से धनु राशि में प्रवेश हो रहा है” जो ज्योतिषीय दृष्टि से भारत के लिए एक सकारात्मक परिवर्तन होगा क्योंकि पिछले लगभग दो वर्षों से शनि भारत की कुंडली में स्थित केतु पर गोचर कर रहा था जो व्यावसायिक औद्योगिक और तकनीकी विकास में बाधक बनता है पर अब 26 जनवरी 2017 को धनु राशि में प्रवेश कर रहा है, शनि का धनु राशि में आना भारत में विशेष रूप से व्यवसायिक उन्नति कराएगा, रोजगारों में वृद्धि होगी नए उद्योग और कार्यों का संचालन होगा देश में में तकनीकी प्रगति और नयी तकनीकों का विकास होगा।

।। श्री हनुमते नमः ।।

comments

Leave a Reply

Your email address will not be published.