समृद्धि का पर्व है धनतेहरस

समृद्धि का पर्व है धनतेहरस
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 October 26, 2016

दीपावली भारतीय संस्कृति और हिन्दू सनातन परम्पराओं में सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विराट स्वरुप वाला पर्व है जिसे पँच पर्व (धनतेहरस, छोटी दीवाली, दीपावली, गौवर्धन, भैया दूज) के रूप में मनाया जाता है पर इसमें भी पंचपर्व के प्रथम दिन का बड़ा विशेष महत्व है जिसे हमधन त्रियोदशीयाधनतेहरसके रूप में मनाते हैं, धनतेहरस के दिन से ही दीवाली के पर्व का आरम्भ हो जाता है, पौराणिक दृष्टि से तो धन तेहरस का विशेष महत्व है ही पर आज के अर्थप्रधान समय में समृद्धि प्रदान करने वाले दिन के रूप में धनतेहरस का महत्व बहुत बढ़ गया है।

धनतेहरस का महत्व

हिन्दू वैदिक पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रियोदशी तिथि को धनत्रियोदशी या धनतेहरस के रूप में मनाया जाता है  इस बार धनतेहरस का पर्व 28 अक्टूबर 2016 शुक्रवार के दिन मनाया जायेगा, इस दिन घर में नयी वस्तुएं विशेष कर बर्तन, आभूषण, सजावट का सामन नवीन वस्त्र आदि खरीद कर लाने की परम्परा है। अब धनतेहरस के वास्तविक महत्त्व को समझते हैं पौराणिक व्याख्यानों के अनुसार सतयुग में समुन्द्र मंथन के समय कार्तिक कृष्ण त्रियोदशी के ही दिन समुन्द्र से भगवान धन्वंतरिका प्राकट्य हुआ था भगवान् धन्वतरि अपने एक हाथ में अमृत कलश और दूसरे हाथ में आयुर्वेद का ग्रन्थ लेकर अनन्त समृद्धि स्वर्ण रजत आभूषण आदि के साथ प्रकट हुए थे तो भगवान् धन्वंतरि के प्राकट्योत्सव के रूप में ही धन त्रियोदशी का पर्व मनाया जाता है उनके नाम धन्वंतरि से ही इस पर्व का नाम धनतेहरस पड़ा, धन्वंतरि को आयुर्वेद के प्रवर्तक और चिकित्सा का देवता माना गया है इसलिए इस दिन आयुर्वेदाचार्य और चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़े लोग भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं और सबके अच्छे स्वास्थ की कामना करते हैं

धनतेहरस का दूसरा महत्व यम दीपदान को लेकर है इस दिन संध्या के समय प्रदोषकाल में मुख्यद्वार पर यमराज के के निमित्त दीपदान किया जाता है अर्थात दीप प्रज्वलित किया जाता है और स्वस्थ दीर्घायु की कामना की जाती है यमराज को मृत्यु का देवता माना गया है जो कर्मबन्धनों के अनुरूप व्यक्ति को परिणाम देते हैं धनतेहरस के दिन संध्याकाल में यमदेव के निमित्त दीप प्रज्वलित करने से परिवार के सदश्यों की अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं से रक्षा होती है तथा दीर्घायु प्राप्त होती है।

अब धनतेहरस के वर्तमान स्वरुप की बात करते हैं जो आज के समय में बहुत विशेष महत्व रखता है धनतेहरस को समृद्धि प्रदान करने वाला दिन माना गया है क्योंकि इस दिन भगवान् धन्वतरि अमृत से भरा स्वर्ण कलश और स्वर्ण रजत आभूषणों के साथ प्रकट हुए थे इसलिए धनतेहरस का सम्बन्ध जीवन की धन और समृद्धि से जोड़ा गया है इसी लिए धनतेहरस के दिन नए बर्तन, सोना, चाँदी और आभूषणों को खरीदना बाहुत शुभ और समृद्धि देने वाला माना गया है प्राचीन मान्यताओं के अनुसार धनतेहरस पर की गयी खरीददारी से घर की समृद्धि में तेरह गुना वृद्धि होती है इस लिए धनतेहरस पर नवीन वस्तुओं को घर में लाना बहुत ही शुभ और समृद्धि देने वाला माना गया है धनतेहरस पर विशेष रूप से नये बर्तन, सोना, चाँदी, आभूषण, नए वस्त्र, और गृह-सज्जा का समान खरीदना शुभ माना गया है। सके अलावा धनतेहरस का दिन एक परमसिद्ध मुहूर्त भी होता है अतः इस दिन नये कार्यों का आरंभ (ऑफिस ओपनिंग, नीवपूजन, गृहप्रवेश, नए घर की बुकिंग, बिजनेस डील आदि) और नए वाहन की खरीददारी भी बहुत शुभ मानी गयी है

इस धनतेहरस पर विशेष –

वैसे तो धनतेहरस का समृद्धि-प्रधान पर्व प्रतिवर्ष ही बड़े उत्साह उल्लास और श्रद्धापूर्ण रूप से मनाया जाता है पर इस बार धनतेहरस पर ज्योतिषीय दृष्टि से कुछ ऐसे विशेष योग बन रहे हैं जिससे इस बार धनतेहरस का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया है। इस बार 28 अक्टूबर को धनतेहरस का पर्व मनाया जायेगा पर इस बार दो बहुत शुभ योग धनतेहरस पर पड़ रहे हैं सर्वप्रथम तो धनतेहरस पर “शुक्रवार” का होना बहुत ही शुभ संयोग है इसके अलावा इस दिन बृहस्पति और चन्द्रमाँ एकसाथ कन्या राशि में होने से “गजकेसरी योग” भी बन रहा है, शुक्रवार को समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी का दिन माना गया है साथ ही ज्योतिष में शुक्र को ही धन, समृद्धि और ऐश्वर्य का ग्रह माना गया है वहीँ दूसरी और गजकेसरी योग को धन, ऐश्वर्य और समृद्धि प्रदान करने वाला योग माना गया है जिससे इस बार धनतेहरस पर “शुक्रवार और गजकेसरी” योग की उपस्थिति के कारण इस बार धनतेहरस पर की गयी नवीन वस्तुओं की खरीददारी कई गुना समृद्धि प्रदान करेगी। धनतेहरस को लेकर इस बार एक और विशेष बात है वैसे तो धनतेहरस का पर्व मुख्य रूप से 28 अक्टूबर शुक्रवार के दिन ही मनाया जायेगा परंतु 27 अक्टूबर की शाम 4 बजकर 15 मिन्ट से ही त्रियोदशी तिथि शुरू हो जाएगी इसलिए 27 अक्टूबर की शाम 4:15 के बाद भी धनतेहरस की खरीददारी की जा सकती है।

धनतेहरस पर खरीददारी के शुभ मुहूर्त –

धनतेहरस का दिन नवीन वस्तुओं की खरीददारी के लिए बहुत शुभ होता है पर इसमें भी यदि विशेष शुभ चौघड़िया मुहूर्तों में खरीददारी की जाये तो यह विशेष समृद्धिदायक होता है 28 अक्टूबर शुक्रवार को धनतेहरस के दिन प्रातः 6:30 बजे से 10:30 बजे के मध्य चर, लाभ और अमृत के शुभ चौघड़िया मुहूर्त रहेंगे जो प्रातः काल में खरीददारी करने के लिए शुभ समय होगा 28 अक्टूबर को धनतेहरस के दिन प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक राहुकाल रहेगा अतः प्रातः 10:30 से 12 बजे के मध्य खरीददारी से बचें इसके बाद दोपहर 12:5 बजे से 1:30 बजे के बीच शुभ चौघड़िया और अभिजीत मुहूर्त रहेगा यह खरीददारी का शुभ समय होगा इसके बाद शाम को 4:10 बजे से 5:30 के मध्य चर चोघडिया में खरीददारी करना भी शुभ होगा इसके बाद रात्रि  के समय 8:48 से 10:26 के मध्य लाभ चौघड़िया में खरीददारी करना भी शुभ होगा।

शुभ मुहूर्त –      प्रातः 6:30 से 10:30

                      दोपहर 12:5 से 1:30

                      शाम 4:10 से 5:30

                      रात्रि 8:48 से 10:30  

शाम को करें दीपदान

धनतेहरस वाले दिन संध्या के समय प्रदोषकाल में अपने घर के पूजा स्थल के पास गेहूं की छोटी सी ढेरी बनाकर उसके ऊपर घी का एक दीपक भगवान धन्वंतरि के निमित्त प्रज्वलित करें और पूरे परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और सामृद्धि की प्रार्थना करें इसके बाद घर के मुख्यद्वार पर या घर की दक्षिण दिशा में एक दीपक यमदेव के निमित्त प्रज्वलित करें और परिवार के सदस्यों की दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना करें धनतेहरस पर इस प्रकार भगवान् धन्वंतरि और यमदेव के निमित्त दीपदान करने से घर में स्वास्थ और समृद्धि का आगमन होता है।

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