धन की समस्या और वास्तु

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 January 12, 2017

हमारे जीवन में हमारी छोटी बड़ी सभी आवश्यकताओं को पूरा करने में धन के महत्त्व को तो हम सब जानते ही हैं आज के समय में जन्म से मृत्यु पर्यन्त हर कदम पर हमें धन की आवश्यकता पड़ती ही है पर आज के जीवन की इस मूलभूत आवश्यकता को लेकर भी अधिकांश व्यक्ति संघर्ष में रहते हैं कुछ लोगो की धनसमृद्धि हमेशा अच्छी बनी रहती है कुछ लोग धन के लिये हमेशा संघर्ष करते हैं वहीँ कुछ लोगो को अच्छी धन प्राप्ति होने पर भी उनके जीवन में समृद्धि नहीं पाती। हमारे जीवन के सभी घटकों को जहाँ हमारी जन्मकुंडली प्रदर्शित करती है वहीँ हमारे घर की वास्तु से भी हमारा जीवन पूरी तरह प्रभावित होता है वास्तव में वास्तुशास्त्र प्राकर्तिक ऊर्जाओं के उपयोग की विद्या है जिसके द्वारा हम किसी स्थान की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं वहीँ यदि घर में वास्तु दोष हों तो वो घर की समृद्धि पर बुरा प्रभाव भी डालते हैं

वास्तुशास्त्र में मुख्य रूप से पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान (उत्तरपूर्व), आग्नेय (दक्षिणपूर्व), वायव्य (उत्तरपश्चिम) नैऋत्य (दक्षिणपाश्चिम) आठ दिशाओं का मूल्यांकन होता है। वस्तुशात्र में गृहनिर्माण के अतिरिक्त घर की प्रत्येक दिशा हमारे जीवन के किसी ना किसी विशेष पक्ष को नियंत्रित  करती है अतः किसी भी दिशा में दोष होने पर उस दिशा से नियंत्रित पक्ष को लेकर हमारे जीवन में संघर्ष बढ़ जाता है या पुरुषार्थ करने पर भी परिणाम नहीं मिल पाते। वास्तु के मूल सिद्धांत के अनुसारभूखण्ड या घर का पूर्व, उत्तर और ईशान कोण हमेशा नीचे, हलके खाली और स्वच्छ होने चाहिए तथा दक्षिण, पश्चिम और नैऋत्य कोण हमेशा ऊँचे, भारी और भरे हुए होने चाहिएवास्तु के अनुसार घर कीउत्तर दिशाका स्वामी भगवान कुबेर को माना गया है अतः घर की उत्तर दिशा घर के आर्थिक पक्ष को नियंत्रित करती है इसके आलावाईशान कोण” (उत्तर और पूर्व के बीच का कोना) घर में धनागमन, आय के स्त्रोत, घर का विकास, समृद्धि, उन्नति, कार्यों की सफलता आदि सभी को नियंत्रित करता है अतः पूरे घर की वास्तु में आर्थिक स्थिति को देखने के लिए वास्तु के अन्य नियमों के अतिरिक्त ईशान कोण और उत्तर दिशा का अधिक महत्व होता है।

कौनसे वास्तुदोष बढ़ाते हैं आर्थिक समस्यायें

  1. यदि घर की उत्तर दिशा में ऊँचा निर्माण हुआ हो और दक्षिण, पशिम दिशाएं उत्तर से नीची हो तो घर में आर्थिक समस्याएं बनी रहती हैं।
  2. यदि उत्तर दिशा में टॉयलेट बना हुआ हो तो घर की आर्थिक स्थिति हमेशा बिगड़ी रहेगी।
  3. यदि उत्तर दिशा में रसोई या जीना (स्टेयर) बना हुआ हो तो अनचाहे खर्च बहुत होते हैं और धन की स्थिति असंतोषजनक बनी रहती है।
  4. घर के ईशान कोण में यदि टॉयलेट, किचन या जीना बन हुआ हो तो घर की समृद्धि रूक जाती है और धनागमन में बहुत बाधायें आती हैं।
  5. यदि घर का ईशान कोण कटा हुआ हो और पूरा 90 डिग्री का ना हो तो भी ऐसे घर में धन की कमी हमेशा बनी रहती है।
  6. यदि घर की दक्षिण दिशा और नैऋत्य कोण में बोरिंग या कोई गढ्ढा हो तो ऐसे में घर में धन कभी स्थिर नहीं हो पाता अनचाहे खर्चों के कारण आर्थिक स्थिति हमेशा उतारचढाव में रहती है।
  7. यदि घर का मुख्य द्वार नैऋत्य कोण (दक्षिणपश्चिम) में हो तो भी घर में आर्थिक समृद्धि नहीं पाती।
  8. जिस घर में पूर्व, उत्तर, ब्रह्मस्थान और ईशान कोण में कूड़ाकचरा फैला रहता हो ऐसे घर में अच्छे आय स्त्रोत होने पर भी धन की बरक्कत नहीं हो पाती।
  9. यदि घर के उत्तर और ईशान कोण में दक्षिण और पश्चिम से अधिक भार हो तो भी घर में धन की समस्या बनी रहती है।
  10. यदि पैसों को घर या कमरे के वायव्य कोण (उत्तरपश्चिम) में रखा जाता हो इससे आर्थिक स्थिरता नहीं पाती धन एकत्रित नहीं हो पाता और घर में समृद्धि नहीं पाती।
  11. जिस घर में सभी सामान अस्तव्यस्त पड़ा रहता हो वहां आर्थिक समस्याएं बनी रहती हैं।     
  12. घर की उत्तर दिशा और ईशान कोण में यदि बड़े और ऊँचे और बड़े पेड़ लगे हों तो यह भी घर की  आर्थिक उन्नति में बाधा बनता है।
  13. घर के मुख्य द्वार पर यदि हमेशा कूड़ा करकट जमा रहता हो या मुख्य द्वार हमेशा अस्वच्छ रहता हो तो ये भी घर की आर्थिक उन्नति को रोकता है।

आपकी किचन बताती है आपकी आर्थिक स्थिति

  1. यदि रसोई में गैस का चूल्हा उत्तर दिशा में रखा हो तो आर्थिक समृद्धि में बाधाएं आती हैं।
  2. यदि रसोई में सामान अस्त व्यस्त रखा हुआ हो या रसोई में बहुत गंदगी रहती हो तो यह घर में धन की सम्पन्नता नहीं आने देता।
  3. रसोई में गैस चूल्हा और सिंक यदि एक ही रेखा में रहे हों तो ये भी घर की समृद्धि को बाधित करता है।
  4. रसोई में यदि बर्तन बिखरे पड़े रहते हों तो इससे भी घर की समृद्धि रूकती है।

विशेष किसी भी घर या मकान का केवल बड़ा या आकर्षक होना ही उस घर की समृद्धि को निश्चित नहीं करता भले ही आप किसी छोटे मकान या घर में रहते हो यदि वहां वास्तु अनुरूप निर्माण और व्यवस्था हो तो घर में सदैव सकारात्मक ऊर्जाएं अच्छी बनी रहती हैं और सीमित आय स्त्रोत होने पर भी घर में धन की बरक्कत होती है परन्तु वास्तु नियमों के विरुद्ध निर्मित घर में अच्छा धनागमन होने पर भी घर में समृद्धि नहीं पाती और बार बार उतारचढाव का सामना करना पड़ता है।  

आर्थिक समृद्धि के वास्तु अनुरूप उपाय

  1. घर के उत्तर, पूर्व और ईशान कोण को हमेशा साफ, स्वच्छ और हल्का रखने का प्रयास करें।
  2. घर के मुख्य द्वार पर कूड़ा कचरा जमा होने दें।
  3. घर के नैऋत्य कोण  (दक्षिणपश्चिम) को जहाँ तक हो बंद रखे वहां गेट या खिड़की बनायें।
  4. घर किशन कोण में एक नीला बल्ब लगाएं।
  5. उत्तर दिशा में जल से भरा एक कलश रखें और समय समय पर पानी बदलें।
  6. श्रीसूक्त का प्रतिदिन पाठ करें।
  7. ओम शुम शुक्राय नमः का जाप करें
  8. वैभव लक्ष्मी के व्रत करें।

।।  श्री हनुमते नमः ।।

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