ज्योतिष में रत्न धारण की भूमिका

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 September 8, 2016

हम सभी अपनी जिज्ञासाओं और समस्याओं के समाधान के लिए ज्योतिषीय परामर्श लेते ही हैं और अधिकांश ज्योतिषी हमें कोई ना कोई रत्न धारण करने की सलाह भी अवश्य देते हैं और हमें आस पास के लोगो को भी हम भिन्न-भिन्न रत्न पहने हुए देखते हैं परन्तु ये रत्न वास्तव में कार्य कैसे करते हैं और हमारी कुंडली के ग्रहों पर किस प्रकार प्रभाव डालते हैं और रत्न धारण में किन किन बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए आदि सभी पहलुओं पर हम यहाँ चर्चा करेंगे और रत्न धारण से जुडी कुछ भ्रांतियों के बारे में भी जानेंगे –
रत्नो का प्रभाव –
रत्नो में एक विशेष प्रकार की शक्ति होती है यह बात हम सभी जानते हैं और बहुत बार स्पष्ठ अनुभव भी करते हैं। वास्तव में रत्नो का जो हम पर प्रभाव पड़ता है वह ग्रहों के रंग व उनके प्रकाश की किरणों के कम्पन्न के द्वारा पड़ता है। हमारे प्राचीन ऋषियों ने अपने अनुशंधान, अनुभव, तपोबल व दिव्यदृष्टि से ग्रहों के रंग को जान लिया था और उसी के अनुरूप उन्होंने ग्रहों के रत्न निर्धारित किये।
जब हम कोई रत्न धारण करते हैं तो वह रत्न अपने ग्रह द्वारा प्रस्फुटित प्रकाश किरणों को आकर्षित करके हमारे शरीर तक पहुंचा देता है और अनावश्यक व हानिकारक किरणों के कम्पन्न को अपने भीतर सोख लेता है अतः रत्न ग्रहों के द्वारा ब्रह्माण्ड में फैली उनकी विशेष किरणों की ऊर्जा को मनुष्य को प्राप्त कराकर एक विशेष फ़िल्टर का कार्य करते हैं।
ज्योतिष में रत्नो का उपयोग –
ज्योतिष-शास्त्र में बताये गये विभिन्न उपायों में रत्नो का भी बड़ा विशेष महत्व है और रत्नो के द्वारा बहुत सकारात्मक परिवर्तन भी जीवन में आते हैं परन्तु वर्तमान में रत्न धारण के विषय में बहुत सी भ्रांतियां देखने को मिलती हैं बहुत से व्यक्ति अपनी मर्जी से कोई भी रत्न धारण क्र लेते हैं और बाद में उन्हें बड़ी समस्याएं उठानी पड़ती हैं। इसी प्रकार अधिकांश व्यक्ति अपनी राशि के अनुसार रत्न धारण कर लेते हैं और उन्हें समाधान मिलने के बजाये और समस्याएं बढ़ जाती हैं वास्तव में रत्न कभी भी हमारी राशि के अनुसार तो धारण किये ही नहीं जाते रत्न धारण में हमारी राशि नहीं बल्कि कुंडली की लग्न का महत्व होता है सर्वप्रथम तो यह समझना चाहिए के रत्न धारण करने से होता क्या है इसके विषय में यह स्मरण रखें के रत्न पहनने से किसी ग्रह से मिल रही पीड़ा समाप्त नहीं होती या किसी ग्रह की नकारात्मकता समाप्त नहीं होती बल्कि किसी भी ग्रह का रत्न धारण करने से उस ग्रह की शक्ति बढ़ जाती है अर्थात जिस ग्रह से सम्बंधित रत्न पहना है आपकी कुंडली का वह ग्रह बलवान बन जाता है उससे मिलने वाले तत्वों में वृद्धि हो जाती है परन्तु हमारी कुंडली में सभी ग्रह हमें शुभ फल देने वाले नहीं होते कुछ ग्रह हमारी कुंडली के अशुभ कारक ग्रह होते हैं और उनकी भूमिका हमें समस्या, संघर्ष और कष्ट देने की ही होती है अब यदि ऐसे ग्रह का रत्न धारण कर लिया जाये तो वह अशुभ कारक ग्रह भी बलवान हो जायेगा जिससे वह और अधिक समस्याएं देगा अतः यह तो निश्र्चित है के किसी भी व्यक्ति के लिए हर एक रत्न शुभ नहीं होता। रत्न धारण में हमारी जन्मकुंडली की लग्न का ही महत्व होता है कुंडली के लग्नेश और लग्नेश के मित्र ग्रह जो त्रिकोण(1,5,9) के स्वामी भी हों उन्ही ग्रहों का रत्न धारण किया जाता है। यह बात भी ध्यान रखें के रत्न धारण का कुंडली में चल रही दशाओं से भी कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है ऐसा बिलकुल नहीं है के जिस ग्रह की महादशा या अंतर्दशा चल रही है उसी ग्रह का रत्न धारण कर लिया जाये बिना विश्लेषण के यह हानिकारक हो सकता है क्योंकि केवल हमारी कुंडली के शुभ फल कारक ग्रहों के रत्न ही धारण किये जाते है जो हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं
विशेष –
इस बात का हमेशा ध्यान रखें की विभिन्न टीवी चैनल्स, समाचारपत्रों या विज्ञापनों से प्रभावित होकर राशि के आधार पर कोई भी रत्न धारण ना करें रत्न पहनने का हमारी राशि से कोई सम्बन्ध नहीं है यह हानिकारक हो सकता है किसी व्यक्ति को रत्न धारण करने का परामर्श देने के लिए ज्योतिषी को व्यक्ति की कुंडली का गहन विश्लेषण करना पड़ता है व्यक्ति का लग्न क्या है शुभ कारक ग्रह कौनसे हैं कुंडली में ग्रहस्थिति किस प्रकार की है और व्यक्ति को रत्न धारण करने की आवश्यकता है भी या नहीं अतः किसी योग्य व्यक्ति के परामर्श से ही रत्न धारण करने चाहिए।
नवग्रहों के रत्न –
ग्रह          रत्न           धातु                उंगली धारण            मंत्र
सूर्य         माणिक      ताम्बा/सोना     अनामिका                ॐ घृणिः सूर्याय नमः
चन्द्रमाँ     मोती          चाँदी               कनिष्ठा/अनामिका     ॐ सोम सोम सोमाय नमः
मंगल       मूंगा            ताम्बा             अनामिका                 ॐ अंग अंगरकाय नमः
बुध         पन्ना           चांदी/सोना      कनिष्ठा                     ॐ बुम बुधाय नमः
बृहस्पति  पुखराज      सोना               तर्जनी                     ॐ बृम बृहस्पते नमः
शुक्र        हीरा           चाँदी                मध्यमा                    ॐ शुम शुक्राय नमः
शनि       नीलम         चाँदी                मध्यमा                    ॐ शम शनैश्चराय नमः
राहु        गोमेद          अष्टधातु/चाँदी   मध्यमा                     ॐ राम राहवे नमः
केतु       लहसुनिया    अष्टधातु/चाँदी   मध्यमा                    ॐ केम केतवे नमः
जन्म कुंडली की ग्रह स्थिति और आवश्यकता के अनुसार रत्न या उपरत्न और उनका वजन निर्धारित किया जाता है।

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