पँच महापुरुष योग

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 January 7, 2017

ज्योतिषीय ग्रंथों में वैसे तो ग्रहों से बनने वाले अनेको योगो का वर्णन मिलता है पर उन में से कुछ योग  पूर्णतया व्यवहारिक और आज के समय के मुताबिक भी सटीक फल देते हैं उन्ही में से ये पांच योग हैं जिन्हे पँच महापुरुष योग कहा जाता है। असल में पँच महापुरुष योग मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि से बनने वे पांच अलगअलग योग हैं जो जन्मपत्री में इन पांच ग्रहों की विशेष स्थिति से बनते हैं।

पँच महापुरुष योग मेंरूचक, भद्र, हंस, मालवय और शश योग आते हैं मंगल सेरूचकयोग बनता है बुध सेभद्रबृहस्पति सेहंसशुक्र सेमालवयऔर शनि सेशशयोग बनता है इन पांच योगो का किसी कुंडली में एक साथ बनना तो दुर्लभ है परन्तु यदि पँच महापुरुष योग में से कोई एक भी कुंडली में बने तो बहुत से शुभ फलों को बढ़ाता है

रूचकयोग कुंडली में मंगल यदि स्व राशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में होकर केंद्र (1, 4, 7, 10) भाव  में बैठा हो तो इसे रूचक योग कहते हैं।

यदि कुंडली में रूचक योग बना हो तो ऐसा व्यक्ति हिम्मत, शक्ति, प्रक्रम से परिपूर्ण एक निडर व्यक्ति होता है। प्रतिस्पर्द्धा और साहसी कार्यों में हमेशा आगे रहता है ऐसे व्यक्ति को कभी शत्रु दबा नहीं पाते। रूचक योग वाला व्यक्ति जिस बात को ठान ले उसे अवश्य पूरा करता है। इस योग के बनने पर व्यक्ति की मांसपेशियां बहुत अच्छी होती हैं और व्यक्ति उम्र बढ़ने पर भी तरुण अवस्था का प्रतीत होता है।  रूचक योग वाला व्यक्ति कर्मप्रधान होता है और मेहनत करने में कभी नहीं घबराता।

भद्रयोगयदि बुध स्व या उच्च राशि (मिथुन, कन्या) में होकर केंद्र (1,4,7,10) भाव में बैठा हो तो इसे भद्र योग कहते हैं। जब कुंडली में भद्र योग बना हो तो ऐसा व्यक्ति बहुत बुद्धिमान, तर्कशील, दूरद्रष्टा और वाक्पटु होता है

ऐसा व्यक्ति गणनात्मक विषयों में हमेशा आगे रहता है। ऐसे व्यक्ति की कैचिंग पावर बहुत तेज होती है और अच्छे निर्णय लेने में माहिर होता है  भद्र योग वाला व्यक्ति बहुत व्यवहारकुशल होता है किसी भी व्यक्ति को अपनी बातों से जल्दी ही प्रभावित कर देता है अपनी बुद्धि और व्यव्हार से ऐसा व्यक्ति सपफलता पाता है।

हंस-योग – जब बृहस्पति स्व या उच्च राशि (धनु, मीन, कर्क) में होकर केंद्र (1,4,7,10) भाव में बैठा हो तो इसे हंस  योग कहते है।

जिस व्यक्ति की कुंडली में हंस योग हो ऐसा व्यक्ति ज्ञानी और सूझ-बूझ से युक्त होता है। ऐसे व्यक्ति को बहुत सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है। हंस योग वाला व्यक्ति विवेकशील और परिपक्व स्वभाव वाला होता है, ऐसे व्यक्ति समस्याओं का समाधान बड़ी सरलता से ढूंढ लेते हैं और इनमे प्रबंधन अर्थात मैनेजमेंट की बहुत अच्छी कला छिपी होती है और ऐसे व्यक्ति बहुत अच्छे  टीचर के गुण भी रखते हैं और अपने ज्ञान से बहुत नाम कमाते हैं।

मालवय-योग – जब शुक्र स्व या उच्च राशि (वृष, तुला, मीन) में होकर केंद्र (पहला, चौथा, सातवा और दसवा भाव) भाव में बैठा हो तो इसे मालवय योग कहते हैं।

यदि कुंडली में मालवय योग हो तो ऐसे में व्यक्ति को धन ,संपत्ति , ऐश्वर्य और वैभव की प्राप्ति होती है भौतिक सुख- सुविधाएँ बहुत अच्छी मात्रा में प्राप्त होती हैं। ऐसा व्यक्ति बहुत महत्वकांशी होता है और हमेशा बड़ी योजनाओं के बारे में ही सोचता है। मालवय योग वाले व्यक्ति का व्यक्तित्व बहुत आकर्षक होता है , ऐसे व्यक्ति में बहुतसे कलात्मक गुण होते हैं और रचनात्मक चीजों में उसकी बहुत रुचि होती है। मालवय योग वाले व्यक्ति को अच्छा संपत्ति और वाहन सुख प्राप्त होता है।

शश-योग – जब शनि स्व या उच्च राशि (मकर, कुम्भ, तुला) में होकर केंद्र (1,4,7,10) भाव में हो तो इसे शश योग कहते हैं।

यदि कुंडली में शश योग बना हो ऐसा व्यक्ति ऊँचे पदों पर कार्यरत होता है यह योग आजीविका की दृष्टि से बहुत शुभ होता है ऐसा व्यक्ति अपने कार्य क्षेत्र में बहुत उन्नति करता है, दूरद्रष्टा और गूढ़ ज्ञान में रुचि रखने वाला होता है , ऐसे व्यक्ति को जनता की बहुत सपोर्ट मिलती है और जीवन में अच्छी सफलता को प्राप्त करता है, शश योग वाला व्यक्ति अनुशाशन प्रिय होता है और अपने कर्तव्यों का पूरी तरह निर्वाह करता है।

।। श्री हनुमते नमः ।।

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