करियर की सफलता या संघर्ष के ग्रहयोग

करियर की सफलता या संघर्ष के पीछे होते हैं ये ग्रहयोग
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 December 29, 2016

आजीविका या करियर हमारे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पक्षों में से एक है शिक्षा के बाद हमारा करियर ही जीवन में सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य होता है और हमारे पूरे जीवन का आधार भी हमारा करियर ही होता है जीवन संचालन के लिए जिस धन की आवश्यकता होती है वह भी तो हमारे करियर की स्थिति पर ही निर्भर करता है और  हमारे करियर की सफलता या संघर्ष से ही पूरे जीवन की रूप रेखा बनती है पर करियर को लेकर प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में परिस्थितियां भिन्न भिन्न होती हैं जहाँ कुछ लोग सरलता और थोड़े ही प्रयासों से करियर में अच्छी स्थिति को प्राप्त कर लेते हैं वहीँ कुछ लोगो को कठिन परिश्रम के बाद भी करियर में सफलता नहीं मिलती और बहुत बार ऐसा भी देखने को मिलता है के व्यक्ति अच्छी शिक्षा और प्रतिभा होने पर भी करियर की और से परेशान रहता है  वास्तव में हमारी जन्मकुंडली में बनने वाली ग्रह स्थितियां ही हमारे करियर की सफलता या संघर्ष को निश्चित करती हैं तो आइये देखते हैं के ज्योतिषीय दृष्टि से हमारी कुंडली में कौनसे ग्रह और ग्रहस्थितियां करियर को नियंत्रित करती हैं।

हमारी जन्मकुंडली मेंदशम भावहमारी आजीविका या करियर की स्थिति का कारक भाव होता है इसके अलावाशनिको आजीविका का नैसर्गिक कारक माना गया है अतः कुंडली में दशम भाव, दशमेश और शनि की स्थिति पर ही  हमारे करियर की सफलता या संघर्ष निर्भर करते हैं अर्थात कुंडली में दशम भाव और शनि अच्छी स्थिति में होंगे तो करियर में अच्छी सफलता होगी और दशम भाव शनि के कमजोर होने पर करियर में संघर्ष की स्थिति रहेगी।

करियर में अच्छी सफलता के योग

  1. यदि कुंडली में दशमेश (दसवे भाव का स्वामी ग्रह) दशम भाव में ही स्थित हो या दशमेश की दशम भाव पर दृष्टि हो तो व्यक्ति को करियर में अच्छी सफलता मिलती है।
  2. यदि दशमेश स्व या उच्च राशि में होकर शुभ स्थान में हो तो व्यक्ति का करियर अच्छा होता है।
  3. दशमेश यदि बली होकर केंद्र (1,4,7,10 भाव) या त्रिकोण (1,5,9 भाव) में हो तो करियर में सफलता मिलती है।
  4. दशमेश का यदि शुभ भावों के स्वामियों के साथ राशि परिवर्तन हो रहा हो तो ये भी करियर में अच्छी सफलता दिलाता है, जैसे दशमेश लग्न में हो और लग्नेश दशम भाव में हो तो व्यक्ति को अच्छी सफलता मिलती है।
  5. यदि शनि स्व या उच्च राशि (मकर, कुम्भ, तुला) में होकर शुभ स्थान में हो तो भी करियर में अच्छी सफलता मिलती है।
  6. बलवान बृहस्पति की दशम भाव और शनि पर दृष्टि पड़ना भी करियर के लिए अच्छा होता है।

करियर में संघर्ष के योग

  1. कुण्डली में यदि दशमेश (दसवे भाव का स्वामी ग्रह) पाप भाव ( 6,8,12 भाव) में हो तो व्यक्ति को करियर पक्ष में संघर्ष का सामना करना पड़ता है और सफलता देर से मिलती है।
  2. यदि दशमेश नीच राशि में हो तो व्यक्ति का करियर संघर्षमय रहता और परिश्रम का पूरा फल नहीं मिल पाता।
  3. यदि दशम भाव कोई पाप योग (जैसे ग्रहण योग, गुरुचांडाल योग,आदि) बना हुआ हो या दशम भाव में कोई पाप ग्रह नीच राशि में बैठा हो तो भी व्यक्ति को करियर में बहुत बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
  4. पाप भाव के स्वामियों का भी दशम भाव में होना करियर में समस्याएं बढ़ाता है।
  5. आजीविका कारक शनि यदि नीच राशि (मेष) में हो तो ऐसे में व्यक्ति को करियर में स्थिरता नहीं मिल पाती और संघर्ष की स्थिति बनी रहती है।
  6. कुंडली यदि शनि, केतु या मंगल के साथ हो तो व्यक्ति को करियर में बहुत बाधा और उतार चढ़ाव  का सामना करना पड़ता है।
  7. शनि का आठवे भाव में होना या सूर्य से अस्त होना भी करियर में बाधाएं और अस्थिरता देता है।
  8. शनि यदि किसी भी राशि में 0 या अंतिम अंशों  28 29 30 पर हो तो भी करियर में संघर्ष बढ़ता है।

विशेष – करियर की स्थिति के सटीक आंकलन के लिए दसवे भाव और शनि दोनों के बल को देखना जरूरी होता है यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में दशम भाव, दसमेश या शनि कमजोर स्थिति में हों पर उन पर बृहस्पति की दृष्टि पड़ रही हो तो ऐसे में संघर्ष के बाद व्यक्ति को सफलता मिल जाती है दूसरे दृष्टिकोण से बृहस्पति का कमजोर दशम भाव, दशमेश या शनि पर दृष्टि डालना यह दिखाता है के पूजा-पाठ दान पूण्य से करियर की समस्याओं का समाधान हो जायेगा।

ज्योतिष में कुंडली के दशम भाव और शनि को प्रभावित करने वाले ग्रहों के आधार पर ही व्यक्ति के करियर का क्षेत्र निश्चित किया जाता है जो स्वयं में एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है जिस पर हम भविष्य में अवश्य चर्चा करेंगे।

प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में ग्रहस्थिति भिन्न होने के कारण कुंडली के विशेष आंकलन के बाद ही व्यक्ति के लिए सटीक उपाय बताये जाते है पर यहाँ हम करियर की बाधाओं के निवारण के लिए कुछ समान्य उपाय बता रहे हैं जिन्हें प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है –

उपाय –

  1. अपने दशमेश ग्रह के मन्त्र का जाप करें।
  2. ॐ शम शनैश्चराय नमः का रोज जाप करें (एक माला रोज)
  3. शनिवार को पीपल पर सरसो के तेल का दिया जलाएं।
  4. कुत्तो को रोज भोजन दें।
  5. हनुमान चालीसा और संकटमोचन का रोज पाठ करें।

।।श्री हनुमते नमः ।।

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