जानिये कौनसे ग्रहयोग देते हैं धन की अस्थिरता

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 January 6, 2017

धन हमारी जीवन की छोटी बड़ी सभी आवश्यकताओं को पूरा करने और जीवन को निर्वाह करने में अपनी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है प्रत्येक व्यक्ति का प्रारब्ध या कुंडली की ग्रहस्थिति भिन्न भिन्न होने से प्रत्येक व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का स्तर भिन्न होता है पर यहाँ हम सीधे आर्थिक स्थिति की बात करके धन की अस्थिरता की बात कर रहे हैं, बहुत से व्यक्तियों के जीवन में यह समस्या रहती है के धनागमन या धन की प्राप्ति तो अच्छी होती है पर पर अच्छी इनकम या धनप्राप्ति होने पर भी उनके पास धन रुक नहीं पाता अनचाहे खर्च या अन्य किसी भी प्रकार से हमेशा धन की अस्थिरता बनी रहती है और अच्छी धन प्राप्ति के बाद भी जीवन में धन की कमी या अव्यवस्था बनी रहती है तो हमारी कुंडली में कोनसे ग्रहयोग धन को स्थिर नहीं होने देते आइये जानते हैं

हमारी जन्मकुंडली में द्वित्य अर्थातदूसरा भावधन और हमारे पास एकत्रित धन का प्रतिनिधित्व करता है कुंडली काबारहवा भावव्यय, हानि, खर्चा या अस्थिरता का कारक होता है अतः कुंडली में धन भाव, धनेश तथा द्वादश भाव द्वादशेश के द्वारा कुछ विशेष ग्रहस्थितियां बनने पर व्यक्ति को जीवन में धन की अस्थिरता की समस्या होती है

  1. कुंडली में यदि धनेश (दूसरे भाव का स्वामी) बारहवे भाव में बैठा हो तो ऐसे व्यक्ति के पास कभी धन नहीं रूक पाता और धन की अस्थिरता बनी रहती है।
  2. यदि राहु या शनि कुंडली के बारहवे भाव में शत्रु राशि में बैठे हों तो व्यक्ति के पास धन नहीं रूक पाता या अनचाहे खर्चे बहुत होते हैं।
  3. धनेश और द्वादशेश का योग भी धन को स्थिर नहीं होने देता।
  4. यदि कुंडली के बारहवे भाव में कोई पाप योग (ग्रहण योग, गुरुचांडाल योग, अंगारक योग आदि) बन रहा हो तो ऐसे में भी व्यक्ति धन प्राप्ति के बाद भी धन को अधिक समय तक अपने पास नहीं रोक पाता।
  5. बारहवे भाव में यदि कोई पाप ग्रह नीच राशि में हो तो भी धन के नुकसान की समस्या या धन की अस्थिरता की समस्या बनी रहती है।
  6. धन भाव में कोई पाप योग बनने या धनेश के नीच राशि में होने पर भी धन की स्थिरता नहीं बन पाती।

उपाय –

  1. अपनी कुंडली के धनेश (दूसरे भाव का स्वामी) ग्रह के मन्त्र का नियमित जाप करें।
  2. यदि बारहवे या दूसरे भाव में कोई पाप ग्रह हो तो उस ग्रह से सम्बंधित पदार्थो का नियमित दान करना चाहिए।
  3. श्री सूक्त का प्रतिदिन पाठ करें।

।।श्री हनुमते नमः ।।

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