विजय पर्व विजय-दशमी

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 October 10, 2016

विजय दशमीभारत के स्वर्णिम और समृद्ध इतिहास से ही जुड़ा एक बहुत विशेष पर्व है जिसे हमदशहरेके नाम से भी जानते हैं इसके नाम में विजय शब्द होने से ही आभास हो जाता है के यह विजय का पर्व है पर विजय दशमी का पर्व केवल विजय बल्कि धार्मिक, आध्यात्मिक, दार्शनिक और समाजिक सभी दृष्टियों से बड़ा विशेष महत्व रखने वाला है पौराणिक व्याख्यानों और वैदिक गणनाओं के अनुसार लाखों वर्ष पूर्व त्रेता युग में इसी दिन भगवान् श्री राम ने रावण के अहम को नष्ट कर उसका संहार किया था इसी लिए इस दिन को अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है अधर्म पर धर्म की विजय होने से ही इसे विजय दशमी का नाम दिया गया एक तो इस दिन दस शीश वाले रावण का प्रभु राम ने संहार किया दूसरा शास्त्रोक्त दृष्टि से विजय दशमी के इस दिव्य दिवस को दस प्रकार के विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा, चोरी ) का हरण करके सत्प्रेरणा देने वाला पर्व भी माना गया है इसलिए इसे दशहरा भी कहते हैं। आज इतने दीर्घ समय काल के बाद भी सम्पूर्ण भारत में रामलीला के कार्यक्रम और रावण दाह किया जाना बताता है के अधर्म और अन्याय कितना ही प्रबल क्यों हो एक दिन इसी प्रकार वह नष्ट हो ही जाता है विजय दशमी का यह पर्व समाजिक और दार्शनिक दृष्टि से भी हमें संदेस देता है के अधर्म पर धर्म की विजय सदा ही होती रहेगी।

हिंदी वैदिक पंचांग के अनुसार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजय दशमी या दशहरा का पर्व मनाया जाता है इस बार 11 अक्टूबर 2016 मंगलवार को दशहरे का पर्व मनाया जायेगा, दशहरा अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व तो है ही पर वास्तव में यह शक्ति पूजा का भी पर्व है प्रभु श्री राम ने नौ दिनों तक शक्ति उपासना कर शक्तिअर्जन करके दसवे दिन रावण का संहार किया था इसलिए दशहरे को शक्ति पूजा के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है दशहरे के दिन विशेष रूप से विद्या पूजा की जाती है अर्थात व्यक्ति के जीवन में उसके कार्य के अनुरूप जो भी शस्त्र हों उनकी पूजा इस दिन की जाती है क्षत्रिय इस दिन अपने शश्त्रों की पूजा करते हैं तो ब्राहमण शास्त्रों की पूजा करते हैं क्योंकि शास्त्र ही ब्राह्मण का शस्त्र हैं इसी प्रकार विद्यार्थियों को इस दिन अपनी पुस्तकों का पूजन, कारीगरों को अपने औजारों का, चिकित्सकों को अपने उपकरणों का, लेखकों को कलम का पूजन करना चाहिए कहने का तात्पर्य है अपनी विद्याओं का पूजन इस दिन करना चाहिए  इसके साथ दशहरा पूजन में माँ शक्ति के पूजन के साथ साथ श्री राम दरबार का विशेष पूजन किया जाता है

दशहरे का पर्व अपने में बड़ा ही विशेष महत्व रखने वाला माना गया है शास्त्रोक्त दृष्टि से इस दिन में विजय नामक मुहूर्त विद्यमान होने से इसे विजय का दिन माना गया है विजय दशमी या दशहरे को  एक सिद्ध मुहूर्त माना गया है जिसमे किये गए या आरम्भ किये गए शुभ कार्यों में सफलता प्राप्त होती है ऐसी मान्यता है के इस दिन मन में यदि कोई शुभ संकल्प किया जाये तो उसकी पूर्ती होती है इसलिए दशहरे के पर्व को शुभ संकल्प का पर्व भी माना गया है विजय दशमी के दिन दशहरा पूजन के बाद बहने के द्वारा अपने भाइयों को तिलक करने की भी परम्परा है यह वास्तव में विजय तिलक की ही परम्परा है इस दिन बहने अपने भाइयों को तिलक करके जीवन में सदैव उनकी विजय की कामना करती है।

इस बार दशहरा पूजन –

इस बार 11 अक्टूबर मंगलवार को दशहरा पर्व मनाया जायेगा ज्योतिषीय दृष्टि से पूजन या किसी भी शुभ कार्य के लिए स्थिर लग्न और चौघड़िया मुहूर्त का बड़ा विशेष महत्त्व है पर इन दोनों का एक साथ उपस्थित होना बड़ा दुर्लभ होता है इस बार यह शुभ संयोग बन रहा है 11 अक्टूबर को मंगलवार के दिन प्रातः 9 बजकर 9 मिन्ट से स्थिर लग्न वृश्चिक शुरू होगी जो प्रातः 11: 26 तक रहेगी वहीँ प्रातः 9:16 से दोपहर 1:32 के मध्य चर, लाभ और अमृत के शुभ चौघड़िया मुहूर्त भी रहेंगे तो स्थिर लग्न और शुभ चौघड़िया दोनों की उपस्थिति के अनुसार इस बार दशहरा पूजन के लिए विशेष रूप से प्रातः 9 बजकर 16 मिन्ट से प्रातः 11 बजकर 26 मिन्ट में बीच का समय श्रेष्ठ होगा।

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